Sunday, 5 June 2016

सबसे गरीब कौन

जरूर पढ़े ======उपयोगी कथा

सबसे गरीब कौन? एक महात्माजी ने नगरसेठ को गरीब मानकर लाखों रूपए के हीरे दे सबसे दिएः एक प्रेरक कथा.

एक महात्माजी वृक्ष लगाया करते थे. एक दिन उन्होंने वृक्ष लगाने के लिए एक गडढ़ा खोदा तो उन्हें बहुमूल्य रत्नों से भरी एक थैली मिली. महात्माजी को धन की जरूरत नहीं थी.उन्होंने सोचा कि इस धन को सबसे गरीब व्यक्ति को दान करेंगे ताकि उसकी दरिद्रता समाप्त हो और उसका जीवन सुखमय हो जाए. वह सबसे गरीब की खोज में निकले. पूरा दिन बीत गया लेकिन दान के सुपात्र का निर्णय नहीं कर पाए.वह नगरसेठ के घर के पास सुस्ताने को रूके. सेठ का कारोबार विदेशों तक फैला था. हजारों लोग उसके लिए काम करते थे. प्रसिद्धि पाने के लिए सेठ सैकड़ों लोगों को रोज भोजन भी कराता था. इससे राजा भी उसको बहुत मान देता था सो कारोबार फैल रहा था.

महात्माजी ने सेठ को अपने युवा बेटे से बातचीत करते सुना तो कुछ उत्सुकता हुई. सेठ बेटे को व्यापार के पैंतरे सीखा रहा था कि कर्मचारियों के वेतन में से थोड़ी-थोड़ी कटौती किस-किस बहाने की जा सकती है.महात्माजी द्वार पर बैठे सुनते रहे. थोड़ी देर में सेठ बाहर आया. वह महात्माजी को पहचानता था. आदर से उन्हें घर के भीतर ले गया. महात्माजी ने बताया कि वह लाखों रुपए के रत्न किसी निर्धन कोदेकर उसका जीवन सुखमय करना चाहते हैं.फिर उन्होंने वह थैली सेठ को देकर कहा- आशा है आपकी दरिद्रता दूर हो जाएगी और आपका जीवन सुखमय होगा. धन मिलने का सेठ का उत्साह समाप्त हो गया. उसने कहना शुरूकिया कि उसका करोड़ो का कारोबार है. वह निर्धन नहीं है.महात्माजी बोले- जो अपने आश्रितों के हकमें से थोड़ी-छोड़ी चोरी की नीयत रखता हो उससे निर्धन संसार में दूसरा कौन हो सकता है. आप इस धन के सबसे योग्य पात्र हैं. सेठ समझ गया कि महात्माजी ने सारी बात सुनी है.

उसने महात्माजी के पैर पकड़ लिए और कहा कि आपने आंखें खोल दीं. समुद्री लुटेरे हर साल मेरा बहुत सारा धन लूट लेते हैं शायद इसी करनी का फल है. उसने बेटे को महात्माजी के साथ भेज दिया और कहा आज से व्यापार के गुर इनसे सीखो.मित्रों, हम परिश्रम से आजीविका जुटाने वाले रिक्शाचालकों, मजदूरों से कितना मोलभाव करते हैं. उन्हें दबाने की कोशिश करते हैं लेकिन बड़े मॉल में जो मूल्य होता है उसे सहर्ष दे देते हैं यह जानते हुए भी कि अनुचित कीमत ली जा रही है.उस समय हमारा यह ज्ञान कहां जाता है कि हमारे साथ शोषण हो रहा है. अपने से कमजोर को मत दबाइए, उसे प्रेम देकर देखिए आपका भक्त हो जाएगा. किसी श्रमिक ने कभी 10 रुपए ठग लिए तो यह सोचिए कि आपको आज आपको होशियार रहना है किसी बड़े ठगे से.जिंदगी का यह नजरिया शायद गले न उतरे लेकिन कुछ दिनों के लिए आजमा कर ही देख लीजिए, शायद आपका आत्मविश्वास बढ़े और करूणा का भाव आए. यकीन मानिए आपके इस परिवर्तन को आपके करीबीजन महसूस करेंगे।
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