Friday, 11 April 2014

आर्य के बिचार

शांतनु आर्य ने प्रश्न किया - गोवर्धन पर्वत की क्या महिमा है , कृष्ण और गोवर्धन की कहानी मे कितना सच है?

आर्य सिद्धांत क्या कहता हैं- स्वामी दयानंद जी के अनुसार जो ईश्वर इस सृष्टि को अपने में धारण कर सकता हैं, अनगिनत ग्रहों और सूर्य आदि को जिसने उठा रखा हैं उसके लिए एक पर्वत उठाना तो तिनका उठाने से भी सरल हैं। 
यही भाव हिरण्यगर्भ वेद मंत्र में आता हैं कि वह ईश्वर आधार हैं पृथ्वी और अन्य ग्रहों के।
पण्डित चमुपति जी के अनुसार गौवर्धन का अर्थ हैं गौ को वर्धन अर्थात उनकी रक्षा करना। कृष्ण जी के मथुरा प्रवास के समय एक वर्ष भारी वर्षा हुई। गोकुल में बाढ़ आने से गौओ के प्राण संकट में पड़ गये। तब श्री कृष्ण जी ने ऊँचे पर्वत पर उन्हें ले जाने का निश्चय किया। वर्षा कुछदिनों में रुक गई। उसके बाद से उन पर्वतों का नाम गौवर्धन प्रसिद्द हो गया।
पौराणिक बंधूओं ने कृष्ण जी कि महिमा मंडन के लिए कहानी गढ़ ली कि उन्होंने पर्वत को ऊँगली पर उठाया था।