तीन मित्र एक महात्मा से बोले—हम मृत्यु का साक्षात्कार करना चाहते हैं। महात्मा ने एक गुफा की ओर इशारा करके कहा-तुम उस गुफा में जाओ, वहां तुम्हारा मृत्यु से साक्षात्कार हो सकता है। तीनों ने गुफा में झांका तो वहां सोने की अशर्फियों का ढेर देखा। उन्होंने कहा—हम इस सोने को ले जाकर आपस में बांट लेते हैं। बाद में किसी दिन यहां आकर मृत्यु को ढूंढ़ लेंगे। एक ने सुझाव दिया-थोड़ी देर में रात हो जाएगी। तुम दोनों पास के गांव से खाने का सामान और पानी ले आओ, तब तक मैं इनकी रखवाली करता हूं। थोड़ी देर बाद उनमें से एक पास के झरने से पानी लेकर लौटा। जैसे ही उसने गुफा में प्रवेश किया, वहां मौजूद उसके साथी ने तलवार से उसकी हत्या कर दी। वह नहीं चाहता था कि उसे किसी को हिस्सा देना पड़े। उसका दूसरा साथी भी गांव से भोजन लेकर लौटा तो उसकी भी हत्या कर दी। उसने सारा सोना बटोरा और लाए गए भोजन को खाने लगा। लेकिन भोजन करते ही उसकी भी मृत्यु हो गई। भोजन लाने वाले साथी ने भोजन में जहर मिला दिया था, ताकि सारे सोने को वही ले सके। महात्मा की चेतावनी याद नहीं रखकर लोभ में एक-दूसरे से छल करने वाले मित्रों ने मृत्यु का साक्षात्कार तो किया, पर इसके लिए उन्हें अपना जीवन गंवाना पड़ा।
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Friday, 4 September 2015
मृत्यु के कारक
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