बाल विवाह .... निश्चित रूप से हमारे सभ्य समाज
में एक बदनुमा दाग है ....और,
इसकी जितनी भी आलोचना की जाए कम ही है...!
और... ख़ुशी की बात है कि..... अब बाल-विवाह
नामक कुरीति सरकार द्वारा प्रतिबंधित है .... और,
वो होना भी चाहिए क्योंकि... बाल्यकाल में बच्चे
ना तो शारीरिक और ना ही मानसिक रूप से ....
शादी के लिए तैयार होते हैं...!!
लेकिन.... क्या आपने कभी सोचा है कि....
देवभूमि कहे जाने वाले हमारे हिंदुस्तान में ......
आखिर, बाल-विवाह की शुरुआत कैसे और
क्यों हुई....?????
क्योंकि... जब हम अपने हिंदुस्तान की इतिहास
की तरफ नजर दौड़ाते हैं तो..... हमें , रामायण में
सीता स्वयंवर.... एवं , महाभारत काल में
द्रौपदी स्वयंवर, आदि देखने को मिलते हैं....!
दरअसल इस.... ""स्वयंवर"" शब्द का शाब्दिक
अर्थ होता है..... ""स्वयं के लिए वर (पति)
चुनना ....!
अर्थात.... हमारा इतिहास हमें यह साफ़ साफ़
बताता है कि..... प्राचीन भारत में ..... शादी के
समय, लड़कियों की उम्र
तो इतनी तो होती ही थी कि..... वे सही -गलत
का फैसला कर सकें.... जिसके लिए जाहिर सी बात
है कि ....... बालिग़ होना जरुरी है...!
फिर ऐसा अचानक में क्या हो गया कि....जिस
हिन्दू समाज में ... लड़कियों के लिए वर चुनने के
लिए.... स्वयंवर जैसी परिष्कृत व्यवस्था थी.....
अचानक ही वो समाज ..... ""बाल-विवाह""
जैसी कुरीति में जकड गया....?????
असल में इसका उत्तर भी.... इतिहास में
ही छुपा हुआ है.... जब ७८५ ईस्वी के उपरांत .....
मीर कासिम जैसे जेहादियों ने.... हमारे हिंदुस्तान
पर हमला करना शुरू किया...!
मुस्लिम जेहादियों का सिर्फ दो ही काम
था.............. हिंदुस्तान में लूटपाट करना ..... एवं,
हिन्दू पुरुषों को क़त्ल
करना तथा स्त्रियों का बलात्कार कर उसे बंधक
बना लेना...!!
लेकिन... हिंदुस्तान में हिंदुस्तान में हिन्दुओं के
बेहद मजबूत होने के कारण.... मुस्लिम अपने
जिहाद में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहे थे.....
और, हिन्दू राजाओं द्वारा वे बार-बार .....
कुत्तों की तरह खदेड़ दिए जा रहे थे...!
इसीलिए , वे लगभग पांच सौ वर्षों तक.... बाहर
से आकर लूट-पाट करते रहे...!
परन्तु... १२०६ ईस्वी में पहली बार ..... मुहम्मद
गोरी नामक जेहादी ने ... अपने लूले गुलाम ....
कुतुबुद्दीन ऐबक को .... दिल्ली में स्थापित
कर .... उसे हिंदुस्तान में जिहाद फ़ैलाने
का जिम्मा दे दिया...!!
इसके बाद तो मानो.... हिंदुस्तान में
जेहादियों की बाढ़ सी आ गयी...!
और.. लुटेरे बाबर से लेकर .... औरंगजेब तक ने ....
हमारे हिंदुस्तान में जम कर उत्पात मचाया...!
मीर कासिम की ही तरह..... हर मुस्लिम
जेहादियों ने... अपने तथाकथित बलात्कारी रसूल
मुहम्मद के नक़्शे कदम पर चलते हुए..... हिन्दू
पुरुषों को क़त्ल करने .... मंदिरों को अपवित्र कर
उनमे मुर्दे वगैरह गाड़कर.... उसे मस्जिद
बना देना...... तथा, स्त्रियों का बलात्कार कर उसे
बंधक बनाने पर ...... ध्यान केंद्रित किया ....
( आज भी आप.... उस जिहाद का साक्षात रूप इराक
में देख सकते हो )
लेकिन... जब मुस्लिमों ने हिंदुस्तान में
ही रहकर .... जिहाद को फैलाना शुरू किया तो.....
उन्होंने अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव किया.....
और, समाज सुधार के नाम पर ..... कुँवारी और
विधवा स्त्रियों को अपनी प्राथमिकता में
रखा ..... तथा, उन्ही के उद्दार करने के नाम
पर....... उन्हें अपने हरम में लेकर जाने लगे...!
इसीलिए, इस विकट परिस्थिति से निपटने एवं
स्वाभिमानी हिन्दुओं ने....
अपनी पुत्रियों की रक्षा के लिए...... बाल-विवाह
का सहारा लिया.... ताकि, उसे विवाहित घोषित
कर उसके मान-सम्मान की रक्षा की जा सके...!!
आश्चर्य की बात है कि..... लोग , बाल-विवाह
को हिन्दू समाज की कुरीति बताने में तो आगे रहते
हैं..... लेकिन, ये परंपरा हिन्दुओं
को क्यों अपनानी पड़ी...... इस विषय में वे
चर्चा तक नहीं करना चाहते ...!!
इसीलिए.... सच्चाई को जानो हिन्दुओं.....
क्योंकि... सच्चे इतिहास
की जानकारी ही आगामी समय में..... भविष्य में
उसकी पुनरावृति को रोक पाने में सक्षम होंगे...!!
Friday, 28 November 2014
बाल विवाह
कहानिया
एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ।
लड़का दौड़कर आया।
उसने पानी का गिलास भरकर सेठ
की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा,
कितने पैसे में?
लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।
सेठ ने उससे कहा कि पंदह पैसे में देगा क्या?
यह सुनकर लड़का हल्की मुस्कान
दबाए पानी वापस घड़े में उड़ेलता हुआ आगे बढ़ गया।
उसी डिब्बे में एक महात्मा बैठे थे,
जिन्होंने यह नजारा देखा था कि लड़का मुस्कराय मौन रहा।
जरूर कोई रहस्य उसके मन में होगा।
महात्मा नीचे उतरकर उस लड़के के
पीछे- पीछे गए।
बोले : ऐ लड़के ठहर जरा, यह तो बता तू हंसा क्यों?
वह लड़का बोला,
महाराज, मुझे हंसी इसलिए आई कि सेठजी को प्यास तो लगी ही नहीं थी।
वे तो केवल पानी के गिलास का रेट पूछ रहे थे।
महात्मा ने पूछा -
लड़के, तुझे ऐसा क्यों लगा कि सेठजी को प्यास लगी ही नहीं थी।
लड़के ने जवाब दिया -
महाराज, जिसे वाकई प्यास लगी हो वह कभी रेट नहीं पूछता।
वह तो गिलास लेकर पहले पानी पीता है।
फिर बाद में पूछेगा कि कितने पैसे देने हैं?
पहले कीमत पूछने का अर्थ हुआ कि प्यास लगी ही नहीं है।
वास्तव में जिन्हें ईश्वर और जीवन में
कुछ पाने की तमन्ना होती है,
वे वाद-विवाद में नहीं पड़ते।
पर जिनकी प्यास सच्ची नहीं होती,
वे ही वाद-विवाद में पड़े रहते हैं।
वे साधना के पथ पर आगे नहीं बढ़ते.
अगर भगवान नहीं हे तो उसका ज़िक्र क्यो??
और अगर भगवान हे तो फिर फिक्र क्यों ???
:
" मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।
हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता..
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया ...
तो बेशक कहना...
जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी
और जो भी पाया वो रब की मेहेरबानी थी!
खुबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में
ज्यादा मैं मांगता नहीं और कम वो देता नही....
समय का महत्व
समय का महत्व
एक
छोटी सी कहानी,
जरूर पढिए, और विचार कीजिए ????
एक बार एक यात्री जंगल पथसे
चला जा रहा था! अचानक एक
जंगली हाथी उसकी और
झपटा! बचाव का कोई दूसरा उपाए न देखकर वह
रास्ते में एक कुएँ में कूद पड़ा!
कुएँ के बीच में बरगद का एक
मोटा पेड़ था!
यात्री उसी का तना पकड़कर
लटक गया!
कुछ देर बाद उसकी दृष्टि कुएँ में
नीचे की ओर
गयी! वहां पर एक विकराल मगर
उसके नीचे गिरने की बाट
देख रहा था! भय से व्याकुल हो उसने उपर
की और देखा! उसने
क्या देखा की पेड़ पर लगे शहद के
छत्ते से बूंद बूंद मधु टपक रहा था! स्वाद के
सामने वह भय को भूल गया !
वह मदमस्त होकर बूंद बूंद मधु
पीने लगा!
लेकिन यह क्या ?
उसने देखा की पेड़ का वो तना जिससे
वह लटका हुआ है, उसे एक सफ़ेद और एक
काला चूहा कुतर कुतर के काट रहे है!
इस विचित्र कहानी के लेखक
कहना चाहते है कि,
यह जीवन बड़ा छणिक और बहुत
ही नश्वर है!
हर एक सेकंड इंसान को मौत
की ओर धकेल
रहा है!
ये सांसारिक सुख
भी अस्थायी है!
इसमें हाथी काल है, मगर मृत्यु है,
मधु जीवन रस है और
काला तथा सफ़ेद चूहा दिन और रात है !
इसका अर्थ यह है कि हम प्रत्येक सेकंड
मृत्यु की तरफ बढ रहे है, काल
मृत्यु की तरफ धकेल रहा है, हम
जानते है कि हमारी आयु को ये चूहे
कुतर रहे है परन्तु फिर भी हम
जीवन के इस कटु सत्य को अनुभव
नहीं करते ! और यदि इंसान होकर
भी नहीं जाग पाए
तो बहुत पछताना पड़ेगा..
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
Friday, 21 November 2014
पाप का घड़ा
राम और श्याम दो मित्र थे। दोनों ने दूध बेचने का व्यापार आरम्भ किया। राम स्वाभाव से ईमानदार, शांतिप्रिय, सज्जन व्यवहार का था जबकि श्याम कुटिल, लालची एवं क्रूर स्वाभाव का था। राम ने सदा ईमानदारी से दूध बेचा और कभी मिलावट नहीं करी। जबकि श्याम पानी मिला मिलाकर दूध बेचता रहा। धीरे धीरे श्याम धनी बनता गया और उसके पास अपना मकान, सम्पति आदि हो गए जबकि राम निर्धन का निर्धन बना रहा।
धीरे धीरे राम के मन में एक विचार बार बार घर करने लगा कि क्या कलियुग में अधर्म से ही सुख मिलता हैं? राम के मन में यह विचार उठ ही रहा था कि एक साधु उनके गांव में पधारे। राम ने उनके समीप जाकर कहा- महात्मा जी मनुष्य धर्म से फलता हैं अथवा अधर्म से फलता हैं। महात्मा जी मुस्कुराएं एवं राम को अगले दिन इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए आने को कहा।
राम जब अगले दिन उनके समीप पहुंचा तो उसने देखा की महात्मा जी के यहाँ पर धरती में आठ फुट गहरा गढ़ा खुदा हुआ हैं। महात्मा जी ने राम को उस गढ़े में खड़े होने को कहा। अब उस गढ़े में जल डाला जाने लगा। जब जल राम के पैरों तक पहुँच गया तो महात्मा जी ने पूछा कोई कष्ट। राम ने उत्तर दिया नहीं कोई कष्ट नहीं हैं। जब जल राम कि कमर तक पहुँच गया तो महात्मा जी ने पूछा कोई कष्ट। राम ने उत्तर दिया नहीं कोई कष्ट नहीं हैं। जब जल राम कि गर्दन तक पहुँच गया तो महात्मा जी ने पूछा कोई कष्ट। राम ने उत्तर दिया नहीं कोई कष्ट नहीं हैं। जब जल राम के सर तक पहुँच गया तो महात्मा जी ने पूछा कोई कष्ट। राम ने उत्तर दिया महात्मा जी बाहर निकालिये नहीं तो जान पर बन आएगी।
महात्मा जी ने राम को बाहर निकाला और पूछा अपने प्रश्न का उत्तर समझे। राम ने कहा जी नहीं समझा। महात्मा जी ने कहा- “जब पानी आपके पैरों, कमर, गर्दन तक पंहुचा तब तक आपको कष्ट नहीं हुआ और जैसे ही सर तक पहुँचा आपके प्राण निकलने के हो गए। इसी प्रकार से पापी व्यक्ति के पाप जब एक सीमा तक बढ़ते जाते हैं तब एक समय ऐसा आता हैं कि उसके फल से उसका बच निकलना संभव नहीं होता और वह निश्चित रूप से अपने पापों का फल भोगता हैं। मगर पापों का फल मिलना निश्चित हैं”
“अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दशवर्षाणि तिष्ठति
प्राप्त एकादशे वर्षे समूल्ञ्च् विनश्यति”
शिक्षा- पाप का घड़ा एक न एक दिन भरता अवश्य है।
रामकुमार ओझा
Monday, 17 November 2014
गधे की मजार
एक फकीर किसी बंजारे की सेवा से बहुत प्रसन्न हो गया। और उस बंजारे को उसने एक गधा भेंट किया। बंजारा बड़ा प्रसन्न था गधे के साथ। अब उसे पेदल यात्रा न करनी पड़ती थी। सामान भी अपने कंधे पर न ढोना पड़ता था। और गधा बड़ा स्वामीभक्त था।
लेकिन एक यात्रा पर गधा अचानक बीमार पडा और मर गया। दुःख में उसने उसकी कब्र बनायी, और कब्र के पास बैठकर रो रहा था कि एक राहगीर गुजरा। उस राहगीर ने सोचा कि जरूर किसी महान आत्मा की मृत्यु हो गयी है। तो वह भी झुका कब्र के पास। इसके पहले कि बंजारा कुछ कहे, उसने कुछ रूपये कब्र पर चढ़ाये। बंजारे को हंसी भी आई आयी। लेकिन तब तक भले आदमी की श्रद्धा को तोड़ना भी ठीक मालुम न पडा। और उसे यह भी समझ में आ गया कि यह बड़ा उपयोगी व्यवसाय है।
फिर उसी कब्र के पास बैठकर रोता, यही उसका धंधा हो गया। लोग आते, गांव-गांव खबर फैल गयी कि किसी महान आत्मा की मृत्यु हो गयी। और गधे की कब्र किसी पहूंचे हुए फकीर की समाधि बन गयी। ऐसे वर्ष बीते, वह बंजारा बहुत धनी हो गया।
फिर एक दिन जिस सूफी साधु ने उसे यह गधा भेंट किया था। वह भी यात्रा पर था और उस गांव के करीब से गुजरा। उसे भी लोगों ने कहा, "एक महान आत्मा की कब्र है यहां, दर्शन किये बिना मत चले जाना।"
वह गया देखा उसने इस बंजारे को बैठा, तो उसने कहा, "किसकी कब्र है यहा, और तू यहां बैठा क्यों रो रहा है ?"
उस बंजारे ने कहां, "अब आप से क्या छिपाना, जो गधा आप ने दिया था। उसी की कब्र है। जीते जी भी उसने बड़ा साथ दिया और मर कर और ज्यादा साथ दे रहा है।"
सुनते ही फकीर खिल खिलाकर हंसाने लगा। उस बंजारे ने पूछा - "आप हंसे क्यों ?"
फकीर ने कहां - "तुम्हें पता है। जिस गांव में मैं रहता हूं वहां भी एक पहूंचे हएं महात्मा की कब्र है। उसी से तो मेरा काम चलता है।"
बंजारे ने पूछा - "वह किस महात्मा की कब्र है ?"
फकीर ने जवाब दिया- "वह इसी गधे की मां की।
शिक्षा- जो लोग यह कहते हैं कि केवल आस्था से ही ईश्वर की भक्ति संभव हैं उन्हें यह नहीं मालूम की बिना ज्ञान के आस्था अन्धविश्वास कहलाती हैं।
शिव के गले में मुण्ड माला का रहस्य
भगवान शिव और सती का अद्भुत प्रेम शास्त्रों में वर्णित है। इसका प्रमाण है सती के यज्ञ कुण्ड में कूदकर आत्मदाह करना और सती के शव को उठाए क्रोधित शिव का तांडव करना। हालांकि यह भी शिव की लीला थी क्योंकि इस बहाने शिव 51 शक्ति पीठों की स्थापना करना चाहते थे। शिव ने सती को पहले ही बता दिया था कि उन्हें यह शरीर त्याग करना है। इसी समय उन्होंने सती को अपने गले में मौजूद मुंडों की माला का रहस्य भी बताया था।
मुण्ड माला का रहस्य
एक बार नारद जी के उकसाने पर सती भगवान शिव से जिद करने लगी कि आपके गले में जो मुंड की माला है उसका रहस्य क्या है। जब काफी समझाने पर भी सती न मानी तो भगवान शिव ने राज खोल ही दिया। शिव ने पार्वती से कहा कि इस मुंड की माला में जितने भी मुंड यानी सिर हैं वह सभी आपके हैं। सती इस बात का सुनकर हैरान रह गयी।
सती ने भगवान शिव से पूछा, यह भला कैसे संभव है कि सभी मुंड मेरे हैं। इस पर शिव बोले यह आपका 108 वां जन्म है। इससे पहले आप 107 बार जन्म लेकर शरीर त्याग चुकी हैं और ये सभी मुंड उन पूर्व जन्मों की निशानी है। इस माला में अभी एक मुंड की कमी है इसके बाद यह माला पूर्ण हो जाएगी। शिव की इस बात को सुनकर सती ने शिव से कहा मैं बार-बार जन्म लेकर शरीर त्याग करती हूं लेकिन आप शरीर त्याग क्यों नहीं करते।
शिव हंसते हुए बोले श्मैं अमर कथा जानता हूं इसलिए मुझे शरीर का त्याग नहीं करना पड़ता।श् इस पर सती ने भी अमर कथा जानने की इच्छा प्रकट की। शिव जब सती को कथा सुनाने लगे तो उन्हें नींद आ गयी और वह कथा सुन नहीं पायी। इसलिए उन्हें दक्ष के यज्ञ कुंड में कूदकर अपने शरीर का त्याग करना पड़ा।
शिव ने सती के मुंड को भी माला में गूंथ लिया। इस प्रकार 108 मुंड की माला तैयार हो गयी। सती ने अगला जन्म पार्वती के रूप में हुआ। इस जन्म में पार्वती को अमरत्व प्राप्त होगा और फिर उन्हें शरीर त्याग नहीं करना पड़ा
रामकुमार ओझा
Wednesday, 12 November 2014
बुडी माँ
एक औरत थी,
जो अंधी थी,
जिसके कारण उसके बेटे को स्कूल
में बच्चे चिढाते थे,
कि अंधी का बेटा आ गया,
हर बात पर उसे ये शब्द सुनने
को मिलता था कि "अन्धी का बेटा" .
इसलिए वो अपनी माँ से चिडता था . उसे
कही भी अपने
साथ लेकर जाने में
हिचकता था
उसे नापसंद करता था..
उसकी माँ ने उसे पढ़ाया..
और उसे इस लायक बना दिया की वो अपने पैरो पर
खड़ा हो सके..
लेकिन जब वो बड़ा आदमी बन
गया तो अपनी माँ को छोड़
अलग रहने लगा..
एक दिन एक बूढी औरत उसके घर
आई और गार्ड से बोली..
मुझे तुम्हारे साहब से मिलना है जब गार्ड ने अपने मालिक से
बोल तो मालिक ने कहा कि बोल
दो मै अभी घर पर नही हूँ.
गार्ड ने जब बुढिया से
बोला कि वो अभी नही है..
तो वो वहा से चली गयी..!!
थोड़ी देर बाद जब लड़का अपनी कार से
ऑफिस के लिए
जा रहा होता है..
तो देखता है कि सामने बहुत भीड़
लगी है..
और जानने के लिए कि वहा क्यों भीड़
लगी है वह
वहा गया तो देखा उसकी माँ वहा मरी पड़ी थी..
उसने
देखा की उसकी मुट्ठी में
कुछ है उसने जब
मुट्ठी खोली तो देखा की एक
लेटर जिसमे यह
लिखा था कि बेटा जब तू छोटा था तो खेलते वक़्त
तेरी आँख में सरिया धंस
गयी थी और तू
अँधा हो गया था तो मैंने तुम्हे
अपनी आँखे दे दी थी..
इतना पढ़ कर लड़का जोर-जोर से
रोने लगा..
उसकी माँ उसके पास नही आ
सकती थी..
दोस्तों वक़्त रहते ही लोगो की वैल्यू
करना सीखो..
माँ-बाप का कर्ज हम
कभी नही चूका सकत..
हमारी प्यास का अंदाज़ भी अलग है
दोस्तों,
कभी समंदर को ठुकरा देते है,
तो कभी आंसू तक पी जाते है..!!!
"बैठना भाइयों के बीच,
चाहे "बैर" ही क्यों ना हो..
और खाना माँ के हाथो का,
चाहे "ज़हर" ही क्यों ना हो..!!...
अगर आप अपनी माँ को बेहद प्यार करते है तो ये मैसज को इतना फेला ओ जितना तुम अपनी माॅ। को चाहतें हो
रामकुमार ओझा
किस ऑफ़ लव
सोचो किस ऑफ़ लव का शो चल रहा है एक लड़का अपनी माशूका के साथ किश ऑफ़ लव करने में लगा हुआ है तभी अचानक उसकी नज़र अपनी बहन पर पड़ती है जो उसके बगल में अपने आशिक के साथ किस ऑफ़ लव करने में ब्यस्त है। लड़का अपनी वाली को छोड़ कर बहन के पास जाता है और एक तमाचा उसके गाल पर लगाता है। उसके बाद पेश है उन दोनों के बीच में क्या बात होती है - लड़का - कमीनी तू यहाँ पर क्या कर रही है (लड़की पहले तो डर जाती है लेकिन अपने आशिक़ के सामने पिटने से उसका ईगो हर्ट हो जाता है) लड़की - कुत्ते तू यहाँ पर क्या कर रहा है। लड़का - तुझे हमारी इज्जत की जरा भी परवाह नहीं। लड़की - तुझे बड़ी परवाह है बड़ा आया। लड़का - घर चल आज पापा से तेरी कुटाई करवाता हूँ। लड़की - तेरी भी पोल आज मै खोल कर रहूंगी। लड़का - लेकिन लड़कियों को इस तरह खुले आम ये सब सोभा नहीं देता। लड़की - तेरी माशूका भी तो लड़की है। लड़का - लेकिन तू मेरी बहन है। लड़की - तेरी माशूका भी तो किसी की बहन होगी। लड़का - समझ नहीं रही है मै लड़का हूँ और तू लड़की है। लड़की - मतलब ऐयाशी करने का अधिकार सिर्फ लड़कों को है। लड़का - समझ नहीं रही है यहाँ पर मेरे बहुत सारे दोस्त आएं हैं। लड़की - तेरे दोस्त आएं हैं तो मै क्या करूँ। लड़का - पगली मेरी बदनामी हो जाएगी। लड़की - तो मै क्या करूँ। लड़का - प्लीज यहाँ से चली जा देख सारे लोग फोटो खींच रहे हैं। लड़की - जब तू यहाँ पर ये सब कर सकता है तो मै क्यों नहीं कर सकती। मै नहीं जाउंगी। लड़का - तू ऐसे नहीं मानेगी। लड़का अपनी बहन को पीटना शुरू कर देता है और लड़की भी उससे भिड़ जाती है। सारे मीडिया वाले फोटो खींचने लग जाते हैं और उन दोनों का वहां पर मजाक बन जाता है। क्या आप भी मज़ाक बनना चाहते हैं, आखिर क्यों करते हैं ये सब, प्यार करना कोई गलत बात नहीं है लेकिन प्यार दिल से किया जाता है, प्यार आत्मा से किया जाता है, प्यार एक अहसास होता है, प्यार दिखाने की चीज़ नहीं होती है। खुले आम अंग प्रदर्शन और अश्लीलता दिखने से प्यार नहीं बढ़ता। आपके माता पिता भी आप से प्यार करते है क्या उनका प्रेम भी इसी श्रेणी में आएगा। अगर मेरी बात से सहमत हैं तो शेयर करें। JAI HIND रामकुमार ओझा
क्रोध
एक 12-13 साल के लड़के को बहुत क्रोध आता था। उसके पिता ने उसे ढेर सारी कीलें दीं और कहा कि जब भी उसे क्रोध आए वो घर के सामने लगे पेड़ में वह कीलें ठोंक दे। पहले दिन लड़के ने पेड़ में 30 कीलें ठोंकी। अगले कुछ हफ्तों में उसे अपने क्रोध पर धीरे-धीरे नियंत्रण करना आ गया। अब वह पेड़ में प्रतिदिन इक्का-दुक्का कीलें ही ठोंकता था। उसे यह समझ में आ गया था कि पेड़ में कीलें ठोंकने के बजाय क्रोध पर नियंत्रण करना आसान था। एक दिन ऐसा भी आया जब उसने पेड़ में एक भी कील नहीं ठोंकी। जब उसने अपने पिता को यह बताया तो पिता ने उससे कहा कि वह सारी कीलों को पेड़ से निकाल दे । लड़के ने बड़ी मेहनत करके जैसे-तैसे पेड़ से सारी कीलें खींचकर निकाल दीं। जब उसने अपने पिता को काम पूरा हो जाने के बारे में बताया तो पिता बेटे का हाथ थामकर उसे पेड़ के पास लेकर गया। पिता ने पेड़ को देखते हुए बेटे से कहा – तुमने बहुत अच्छा काम किया, मेरे बेटे, लेकिन पेड़ के तने पर बने सैकडों कीलों के इन निशानों को देखो । अब यह पेड़ इतना खूबसूरत नहीं रहा। हर बार जब तुम क्रोध किया करते थे तब इसी तरह के निशान दूसरों के मन पर बन जाते थे। अगर तुम किसी के पेट में छुरा घोंपकर बाद में हजारों बार माफी मांग भी लो तब भी घाव का निशान वहां हमेशा बना रहेगा। अपने मन-वचन-कर्म से कभी भी ऐसा कृत्य न करो जिसके लिए तुम्हें सदैव पछताना पड़े | क्रोध को कमजोरी नहीं ताकत बनाओ । -रामकुमार ओझा
Monday, 10 November 2014
कूल डूड होते क्या हैं
कूल डूड होते क्या हैं ?
कूल डूड वही हैं जिनको देशी भाषा में "घोंचू"
कहते हैं
खास पहचान कूल्होँ से सरकती हुई पैँट ।
बेतरतीब बढ़े हुए बाल ।
कईँ बार इनके बाल ऐसे दिखते है जैसे जोर का
बिजली का झटका खा कर
आए हों ।
इनके काम होते हैं
लड़कियों के पीछे भागना।
ये अपनी गर्लफ्रेंड से तो जूते भी खा लेते है
और माँ की हर बात
का जवाब बदतमीजी से देते है ।
Cool Dude लोगों की पहचान या लक्षण इस
प्रकार होते है ::
1. इनकी प्रोफाइल पिक्चर पर पश्चिमी सभ्यता
साफ झलकती है।
2. कवर फोटो पर किस करते हुए कपल की
फोटो होगी जैसे
इनकी परंपरा रही हो।
3. धर्म राजनीति समाज संस्कार की बाते
इनको बोरिंग लगती है. ऐसे
टोपीक पे इनका पसंदीदा डैलोग होता है
"अबे यार पका मत" या फिर "यार
तू तो सेंटी हो रहा है चिल्ल मार" आदि |
4. इनके आदर्श रूप में "हनी सिंग" "सुन्नी
लेओनी" आदि काफी पसंद
होते है।
6. इन्हें हिन्दी और अपनी मातृभाषा बोलने में
शर्म आती है। ये लोग Hi,
LoL, What's up, Dude, Thanks या India Is Love, Plz, hmmm
Chatting आदि इस तरह से बात करते हुए
पाये जाते हैं।
7. इनकी एक निशानी और है के ये लोग अपनी प्रोफाइल में कुछ
अच्छी राष्ट्रहित शहीद दिवस या स्वंत्रता सैनानियो से
जुडी देशभक्ति की पोस्ट कभी नही करेंगे..
लेकिन वेलेंटाइन डे
फ्राइडशिप डे आदि की जानकारी ऐसे सहरे
करते है जेसे इनका जनम
ही इसी कर्म के लिए हुआ हो .
8. ये प्रजाति अधिकतर "में केसी लग रही हु"
जेसी फोटो को चुन चुन कर
कमेन्ट करते है.. और लडकियों के कमेन्ट को
लाइक करना और उसके
रिप्लाई में "प्लीज ऐड मी आई एम् ब्लोक"
लिखते हुए भी देखे जा सकते
है ।
9. इस तरह के लोग सुबह मंदिर में जाने में राम
राम करने में अधिकतर
शर्माते है लेकिन पब डिस्को में जाना इनके
लिए स्टेटस सिम्बल होता है।
10. गाये का गोबर दिखे तो नाक भसोड़ लेंगे
लेकिन सुबह सुबह कुत्ते
को मार्निंग वाक् करवाने के के साथ पोटी
करवाते ये दिख जायेंगे । अर्थात
इनको गौ माता से अधिक कुत्ते से प्रेम होता है...
11. इनके लिए रोज 2 रूपए वाली पेप्सी 30
रूपए में खरीद के पीना या उल जलूल चाँद
रूपए के डियो परफ्यूम पे हद से
ज्यादा पैसा खर्चा सही है लेकिन कोई बुजुर्ग या
आस्थावान साल भर में
शिवरात्रि पे थोड़ा दूध चढ़ा दे तो ये एक आर्थिक
रूप से बहुत बड़ा नुक्सान साबित करने के
लिए परवचन देने लगते है.
निष्कर्ष - _/\_ आप खुद समझदार है
समझ जाइए...
॥ इंडियन नहीं हिन्दुस्तानी बनो ॥
#जयहिन्द
-रामकुमार ओझा