Saturday, 28 February 2015

सुख दुःख की पोटरी

हम इंसानों की एक आदत होती है , हमेशा स्वयं को दुखी और दूसरो को अपने से ज्यादे सुखी समझते है, जब कि सच तो यह है कि भगवान् ने सभी को अपने-अपने हिस्से कि सुख और दुख दोनों दिए है।

एक बार एक दुखी भक्त इसी प्रकार ईश्वर से शिकायत कर रहा था कि:-

"आप मेरा ख्याल नहीं रखते, मै आपका इतना बड़ा भक्त हूँ आपकी सेवा करता हूँ , रात-दिन आपका स्मरण करता हूँ , फिर भी मेरी जिंदगी में ही सबसे ज्यादा दुःख क्यों...???

परेशानियों का अम्बार लगा हुआ है, एक खत्म नहीं होती कि दूसरी मुसीबत तैयार रहती है, दूसरो की तो आप सुनते हो, उन्हें तो हर ख़ुशी देते हो,पर मेरे हिस्से में केवल दुःख ही दिए हैं।"

भगवान उसे समझाते कि:-

"ऐसा नहीं है बेटा सबके अपने-अपने दुःख -परेशानिया है, अपने कर्मो के अनुसार हर एक को उसका फल प्राप्त होता है।
यह मात्र तुम्हारी गलत फहमी है की तेरे हिस्से मे ही केवल दुःख है।"

लेकिन नहीं भक्त है कि सुनने को राजी ही नहीं।

फिर एक दिन भगवान् ने एक उपाय निकाला वे बोले:- 

"चलो ठीक है मै तुम्हे एक अवसर और देता हूँ
अपनी किस्मत बदलने का।
यह देखो यहाँ पर एक बड़ा सा पुराना पेड़ है इस पर सभी ने अपने दुःख-दर्द और तमाम परेशानियों, तकलीफों, दरिद्रता बीमारियाँ तनाव , चिंता सब एक पोटली में बाँध कर उस पेड़ पर लटका दिए है।

जिसे भी जो कुछ दुःख हो वो वहां जाता है और अपनी समस्त परेशानियों की एक पोटली बना कर उस पेड़ पर टांग देता है।
तुम भी ऐसा ही करो, इससे तुम्हारी समस्या का हल हो जाएगा।"

भक्त तो खुशी के मारे उछल पडा "धन्य है प्रभु जी आप अभी जाता हूँ मैं भी अपने दुःखो की पोटली लेकर।"

तभी प्रभु बोले:- "लेकिन मेरी एक छोटी सी शर्त है"।

"कैसी शर्त भगवन.?"

"तुम जब अपने सारे दुखो की की पोटली बना कर उस पर टांग चुके होंगे तब उस पेड़ पर पहले से लटकी हुई किसी भी एक पोटली को तुम्हे अपने साथ लेकर आना होगा।"

भक्त को थोड़ा अजीब सा लगा लेकिन उसने सोचा चलो ठीक है देखते हैं।

फिर उसने अपनी सारी समस्याओं की एक पोटली बना कर पेड़ पर टांग दी।

चलो एक काम तो हो गया अब मुझे जीवन में कोई चिंता नहीं, लेकिन प्रभु जी ने कहा था की एक पोटली वापस आते समय साथ ले आना, ठीक है कौन सी वाली लु ये छोटी वाली ठीक रहेगी, दुसरे ही क्षण उसे ख्याल आया मगर पता नहीं इसमे क्या है , चलो वो वाली ले लेता हूँ....

अरे बाप रे मगर इसमे कोई गंभीर बिमारी निकली तो...
नहीं-नहीं अच्छा ये वाली लेता हूँ मगर पता नहीं यह किसकी है और इसमे क्या-क्या दुःख होगा बाप रे....!!!"

हे भगवान् इतना कन्फ्यूजन, वो बहुत परेशान हो गया।

जब तक पता नहीं है की दूसरो की पोटलियो में क्या दुःख - परेशानियां ,चिंता मुसीबते है मगर यदि इनमे अपने से भी ज्यादा दुःख निकले तो ???

"हे भगवान कहाँ हो"

भगवान् तुरंत आ गए और बोले:-"क्यों क्या हुआ जो पसंद आया उसे उठा लो।"

"नहीं प्रभु क्षमा कर दो नादान था जो खुद को सबसे दुखी समझ रहा था यहाँ तो मेरे जैसे अनगिनत है , और मुझे यह भी नहीं पता की उनकी दुःख-चिंता क्या है.?
मुझे खुद की परेशानिया, समस्याए कम से कम मालुम तो है।

नहीं अब मै निराश नहीं होउंगा सभी के अपने अपने दुःख है, मै भी अपनी चिंताओं-परेशानियों का साहस से मुकाबला करूंगा, उनका सामना करूंगा न की उनसे भागुंगा ।

धन्यवाद प्रभु आप जब मेरे साथ है तो हर शक्ति मेरे साथ है।"

इस प्रकार हमें केवल ईश्वर पर भरोसा रख कर अपने श्रेष्ठ कर्म करते रहने चाहिए , सुख-दुःख का चक्र तो निरंतर चलता ही रहेगा।

निरधन ब्राह्मण

आशा है कि आप इसे पढ़ के अपनी कीमती राय देंगे और इस कहानी को अधिक से अधिक अपने मित्रों से साझी करेंगे । कहा जाता है! एक बार अकबर और बीरबल यमुना नदी के किनारे पर ठंडी हवा का आनंद लेते हुए टहल रहे थे । अचानक अकबर एक ब्राह्मण को देखा, बहुत दयनीय हालत में पास से गुजर रहे लोगों से भिक्षा माँग कर रहा है। अकबर इस क्षण का मजाक बनाने का मौका नहीं छोड़ा था, वह बीरबल ने कहा, "बीरबल ओह, तो यह है कि क्या आप के ब्राह्मण जिनको "ब्रह्म देवता" के रूप में जाना जाता है जो इस तरह से भीख माँग रहा है!!!
बीरबल उस समय कुछ भी नहीं कहा है, लेकिन जब अकबर किले में लौट गया, तब बीरबल वापस उसी जगह पर फिर से आया था जहाँ वो ब्राह्मण भिक्षा मांग रहा था। बीरबल उससे बात की, उससे पूछा कि वह क्यों भिक्षायापन करता है? गरीब ब्राह्मण ने कहा है कि उसके पास जो भी था, वह सब खो दिया है, कोई धन अथवा आभूषण नहीं, कोई काम नहीं, कोई भूमि और कोई भी जीवन यापन के संसाधन नहीं शेष रहे तभी वह अपनी परिस्थितियों के अधीन होकर परिवार के भरण पोषण हेतु वह एक भिखारी होने के लिए मजबूर है! बीरबल ने उस से पूछा कि कितना पैसा वह एक पूरे दिन में कमा लेते हैं और गरीब ब्राह्मण ने उत्तर दिया कि वह कुछ 3 से 5 "अशर्फियाँ" कमाता है (सोने के सिक्के उस समय अवधि की मुद्रा) एक दिन में. बीरबल ने भीख माँगना रोकने के लिए उसके लिए काम देने की पेशकश की और पूछा की अगर आप को मेरे लिए काम करना पड़े तो क्या आप भिक्षयापन छोड़ देंगे??? ब्राह्मण ने प्रसन्नता पूर्वक पूछा है कि क्या मेरा काम होगा? मुझे क्या करना है? बीरबल ने उस से कहा कि आप के लिए हर रोज ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर के, स्वच्छ वस्त्र धारण कर के प्रतिदिन इसी स्थान पर सुबह से शाम तक की अवधी में 101 माला गायत्री मंत्र का जाप किया करें और हर शाम को आप के इस स्थान को छोड़ने से पहले,आप को 10 अशर्फियाँ पहुंचा दी जायेंगी। बस ये शर्त है कि आप किसी से भिक्षा नहीं मांगेगे। ब्राह्मण ने सहर्ष इस काम के स्वीकार कर लिया.
अगले दिन से, वह ब्राह्मण एक अलग ही व्यक्ति था, वह उसी जगह पर था, उसी स्थान पर बैठने के लिए, लेकिन किसी से भी भिक्षा याचना नहीं की। वह दिन, किसी भी दिन से अलग था क्योंकि पूरा दिन उस ब्राह्मण ने दिन के अंत तक भिखारी के रूप में कोई अपमान की भावना नहीं झेली और गायत्री जाप के असर से भी उसका मन प्रफुल्लित रहा। और उस शाम को वह प्रसन्नचित्त हो करे 10 अशर्फीयां ले के (जो भिखारी के रूप में अपने दैनिक कमाई की तुलना में अधिक था) अपने परिवार में लौटा। दिन बीते तो बीरबल ने उस के दैनिक जाप की माला संख्या और अशर्फियों की संख्या - दोनों बाधा दीं। अब थोड़ा - थोड़ा करके, वह गायत्री मंत्र के इस जाप का आनंद शुरू कर दिया और उसके दिल को गायत्री मंत्र की शक्तियां दीन दुनिया के प्रवाह से दूर ले जा रहीं थीं। अब वह जल्दी से घर लौटने अथवा अन्य इच्छाओं के लिए चिन्तित नहीं था। भख प्यास इत्यादि शारीरिक व्याधायें उसे अब पहले की तरह नहीं सताती थीं। धीरे धीरे गायत्री मंत्र के शक्तिशाली सतत जाप के कारण, उस के चेहरे पे तेज झलकने लगा। उनका तेज इतना प्रबल हो गया की आने जाने वाले लोगो का ध्यान सहज ही उस ब्राह्मण की ओर आकर्षित होने लगा, वहां अधिक से अधिक लोग उनके दर्शन मात्र की इच्छा से आने लगे और स्वतः ही वहां पर मिठाई, फल, पैसे, कपड़े आदि की भेंट चढाने लगे। कभी 3 से 5 अशर्फिय कमाने के लिए जो ब्राह्मण सारा दिन अपमानित जीवन जीता था, आज उसे ना तो तो अपमान झेलने की ज़रुरत बची, ना ही बीरबल से प्राप्त होने वाली अशर्फियाँ उसे याद रही, और ना ही श्रद्धापूर्वक चढ़ाई गई भेंटों का कोई आकर्षण रहा। वो मन और आत्मा से सारा दिन गायत्री जाप में समाहित हो चुका था। जल्द ही यह खबर कि वहाँ किसी महान योगी संत के आगमन सारे शहर में बहुत प्रसिद्ध हो गई, परन्तु उस ब्राह्मण को स्वयं इस प्रसिद्धी का पता नहीं था। जो लोग वहां दर्शन के लिए आते थे, उन्होंने ही वहां पे उनके स्थान को परवर्तित कर के एक छोटे से मंदिर या आश्रम का स्वरूप दे दिया और दैनिक रूप से वहां पर मंदिर की दिनचर्या की ही तरह पूजा अर्चना होने लगीं।
जल्दी ही यह खबर अकबर को भी पहुँची और उनको भी इस "अज्ञात नए संत" के बारे में उत्सुकता और दर्शनाभिलाषा हुई और उन्होंने भी उस "संत" की तपोभूमि पर दर्शनार्थ जाने का फैसला किया और वह बहुत से दरबारियों आदि और बेशुमार शाही तोहफे के रूप में अच्छी तरह से अपनी राजसी शैली में बीरबल को भी अपने साथ लेकर गया। वहाँ पहुँच कर, साड़ी शाही भेंटे अर्पण कर के ब्राह्मण के पैर छुए। ऐसे तेजोमय संत के दर्शनों से गद-गद ह्रदय ले के बादशाह अकबर, बीरबल के साथ बाहर आ गया। अकबर बहुत खुश और आश्चर्यचकित था इस "संत" ब्राह्मण के तेज को देखने से। जब अकबर-बीरबल ने मंदिर से बाहर कदम रखा, तब अकबर से बीरबल ने पूछा कि आप इस संत को जानतें है? अकबर ने इनकार कर दिया और फिर बीरबल ने उसे बताया कि वह एक ही भिखारी ब्राह्मण जिस पर आप कुछ महीने पहले व्यंग कर रहे थे की ये ही "ब्राह्मण देवता" होता है क्या? और आज आप - बादशाह अकबर - इन्हीं के पैरों में शीश नवा कर आयें हैं ।।। अकबर के आश्चर्य की सीमा नहीं रही और उसी आश्चर्य और असंख्य सवालों में डूबते-उतरते मन को सम्हाल कर बीरबल से पूछा कि यह इतना बड़ा बदलाव कैसे हुआ? बीरबल ने कहा कि वह अपने मूल रूप में ब्राह्मण है, बस वह परिस्थितिवश अपने धर्म की सच्चाई, शक्तियों और विभिन्न उपायों से दूर था और वह केवल अपने धर्म के असीमित कोष से, केवलमात्र गायत्री मंत्र स्वरूप एक उपाय-रूप सन्मार्ग पुनः अपना लिया और देखें कि क्या इन ब्राह्मण की आज जगह है और कैसे बादशाह ने खुद को पाया इनके तेजोमय स्वरुप के सन्मुख !!!
यही गायत्री प्रभाव है !!! तो यह हम सभी पर भी सामान रूप से अच्छी तरह लागू होता है, जो क्षण जीवन में हम हमारे "उपकरण" से दूर रह कर जी रहे हैं जब तक हम पीड़ित हैं ।।। आवश्यकता है की हम भी पुनः अपने धर्म से जुड़ें, अपने संस्कारों को जाने और उनको पूरी तरह माने । मूल ब्रह्म रूप में जो विलीन सो ही ब्राह्मण, सदैव चैतन्य, अजर, अविनाशी स्वरूप ।।। ब्राह्मण को सिर्फ शुद्ध ब्राह्मण होने की ज़रुरत है और फिर उसके कोई रास्ते नहीं रूकते।।।

Friday, 27 February 2015

धन पाने के लिए घर में क्या रखे

धन पाने के लिए घर में क्या रखें, क्या नहीं
जीवन में कई बार कड़ी मेहनत करने के बाद भी पैसों की कमी और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह हमारे अपने घर में छिपी हो सकती है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और पैसों की तंगी होती है। साथ ही कई ऐसी भी चीजें हैं जिन्हें रखने से धन पाने की राह आसान हो सकती है।
१-टूटा हुआ कांच न रखें- वास्तु शास्त्र के मुताबिक टूटी हुई कांच की चीजों को घर में रखने से आर्थिक नुकसान होता है। लिहाजा यदि घर की किसी खिड़की या दरवाजे का कांच टूट जाए तो उसे तुरंत बदलवाएं। साथ ही कांच का टूटा हुआ कोई सामान या टूटा हुआ आईना भी घर में बिल्कुल न रखें।
२-बंद हो चुकी घड़ी- घर में लगी घड़ी यदि बंद पड़ जाए तो उसे भी तुरंत दोबारा शुरू कर दें और अगर घड़ी खराब हो गई हो तो उसे बदल दें। क्योंकि घर में रखी बंद पड़ी घड़ी भी धन संबंधी परेशानियों को बढ़ाती है।
३-भगवान की खंडित मूर्ति- कई बार घर के मंदिर में रखी मूर्ति खंडित हो जाती है, बावजूद इसके हम उसकी पूजा करते रहते हैं। इससे भी घर में नेगेटिव एनर्जी आती है और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी मूर्तियों को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
४-कांटे वाले या सूखे पौधे- कई लोगों को घर में पौधे या फूल लगाने का शौक होता है। इस शौक को पूरा करते वक्त ध्यान रखें कि घर में कांटे वाले पौधे न लगाएं। इससे उन्नति और लाभ में बाधा आती है। साथ ही सूखे या मुर्झाए हुए फूल भी घर में नहीं रखने चाहिए।
५-खराब हो चुके विद्युत उपकरण- घर में हमेशा साफ-सफाई बनाए रखें और कबाड़ इक्ट्ठा न होने दें। यदि कोई विद्युत उपकरण जैसे टीवी, फ्रिज, खराब हो जाए तो जल्द से जल्द इनकी मरम्मत करवाएं, अन्यथा इन्हें घर से बाहर कर दें। इन सामानों से भी घर में परेशानियां आती हैं
६-चांदी के लक्ष्मी गणेश- वास्तु विज्ञान के अनुसार घर में चांदी के लक्ष्मी गणेश की मूर्ति रखने से धन आगमन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं।
७-लक्ष्मी जी के चरण- देवी लक्ष्मी के चरण की पूजा धन वृद्घि कारक मानी जाती है। इसलिए लोग अपने घर में लक्ष्मी के चरण रखते हैं।
८-पंचमुखी हनुमान- वास्तुविज्ञान के अनुसार पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति जिस घर में होती है वहां उन्नति के मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और धन संपत्ति में वृद्घि होती है।
९-धनकुबेर की मूर्ति- कुबेर को सारे संसार के धन का रक्षक माना जाता है, लिहाजा घर में धनकुबेर की मूर्ति रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
१०-कौड़ी- कौड़ी समुद्र से आती है, जहां से मां लक्ष्मी का भी जन्म हुआ था। इसलिए माना जाता है कि पूजास्थल पर कौड़ी रखने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि बनी रहती है।

यह उपयोगी जानकारी शेयर अवश्य करे जिससे आपके परिवारीजन , मित्र और रिश्तेदार इसका लाभ उठा सके
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ऐसी जानकारी कभी आपने नहीं पड़ी होगी

ऐसी जानकारी जो शायद आपने पहले
कभी नही पढ़ी होगी ||:-
1. दही को जल्दी और अच्छी जमाने के
लिए रात को जमाते वक्त दूध में
हरी मिर्च का डंठल तोड़ कर डाल दे !
दही जबरदस्त जमेगी||
2. अगर सब्जी में नमक
ज्यादा हो गया हो तो आटे को गूंथ
कर उसके छोटे - छोटे पेड़े ( लोइयां )
बना कर डाल दे नमक कम हो जायेगा||
3. प्याज को काट कर बल्ब या ट्यूब
लाईट के साथ बाँधने से मच्छर व
छिपकिली और मोर का पंख घर में
कहीं भी लगाने से केवल
छिपकिली नही आती यह आजमाए हुए
हैं.||
4. यदि फ्रिज में कोई भी खुशबू या बदबू
आती है तो आधा कटा हुआ निम्बू रखने
से ख़त्म हो जायेगी एक हज़ार बार
अजमाया हुआ है जी.||
5. चावल के उबलने के समय २ बूँद निम्बू के
रस की डाल दे चावल खिल जायेंगे और
चिपकेंगे नही||
6. चीनी के डब्बे में तीन या चार लौंग
डालने से चींटी नहीं आती ||
7. बरसातों के दिनों में अक्सर नमक
सूखा नही रह पाता वह सिल
( गीला गीला सा) जाता है आप नमक
की डिबिया में ४-५ चावल के दाने
डाल दें बहुत कम उसमे सीलापन आता है
तब.||
8. मेथी की कड़वाहट हटाने के लिये
थोड़ा सा नमक डालकर उसे थोड़ी देर
के लिये अलग रख दें||
9. आटा गूंधते समय पानी के साथ
थोड़ा सा दूध मिलाये। इससे
रोटी और पराठे का स्वाद बदल जाएगा ||
पोस्ट पसंद आई हो तो शेयर करके आगे बढाइये.||
दोस्तो आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी हमे जरूर
वताये और ज्यादा से ज्यादा शेयर करके अपने
दोस्तो को भी पढवाये ।
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मानब सभ्यता कितनी प्राचीन हे चलो आज आपको बताते हे

मानव सभ्यता कितनी प्राचीन है ?
प्रश्न :- मानव सम्वत् कितना है ?
उत्तर :- 1960853115 वर्ष ।
क्योंकि :-
1 सत्युग = 1728000 वर्ष
1 त्रेतायुग =1296000 वर्ष
1 द्वापरयुग = 864000 वर्ष
1 कलियुग = 432000 वर्ष
1 महायुग = 1 सत्युग + 1 त्रेतायुग + 1 द्वापरयुग
+ 1 कलियुग = 4320000 वर्ष
1 महायुग = 4320000 वर्ष
71 महायुग = 1 मनु
14 मनु = मानव सृष्टि की आयु
1 कल्प = 1000 महायुग = 4320000000 वर्ष
( ब्रह्माण्ड की आयु )
अब तक 14 मनुओं में से 6 मनु बीत चुके हैं 7
वाँ वैवस्वत मनु वर्तमान चल रहा है ।
7 वें मनु का 28 वाँ महायुग चल रहा है ।
28 वें महायुग के कलियुग का 5115 वाँ वर्ष चल
रहा है ।
6 मनु + 27 महायुग + 1 सत्युग + 1 त्रेतायुग + 1
द्वापरयुग + 5115 वर्ष = 1960853115 वर्ष ( 15
मार्च 2014 तक )
यानी कि मानव जाति को पृथिवी पर आए
इतना समय हो गया है।एक अरब छियानवें करोड़
आठ लाख तरेपन हजार एक सौ पंद्रह वर्ष ..
(1960853115 वर्ष)
यह गणना सूर्य सिद्धान्त के अनुसार है।

जरूर पड़े

जरूर पढ़ें:-
इस समय स्वाइन फ्लू जैसे फ्लू की वजह से लोगो में भय बना हुआ है । इससे बचाव हेतु कपूर और इलायची के चूर्ण को कपडे में बाँध कर सूंघने का उपाय भी बताया गया है ।
पुराने समय में वातावरण को शुद्ध करने के लिए हमारे ऋषि मुनि हवन किया करते थे । हवन में डाली जाने वाली सामग्री में औषधिय गुण होते है ।
5 मार्च को होली है । होलिका दहन को हम लोग हवन की तरह उपयोग कर सकते है ।
होलिका दहन में कपूर की 2-3 टिकिया जरूर से डाले । एक परिवार से 2-3 टिकिया, एक जगह की होली में लगभग 20 परिवार होली में डालें इसी प्रकार हर स्थान पर जलने वाली होली में किया जाये । होलिका दहन सभी स्थानों पर एक ही मुहूर्त में होता है , जब एक साथ इतने स्थानों पर इस प्रकार की धुआं उठेगी तो वातावरण में से कीटाणुओं का नाश होगा और वातावरण शुद्ध होगा ।
इस बात को सरलता से समझने के लिए हम एक फ़िल्मी दृश्य का उदाहरण लेते है :-
फिल्म कृष 3 में एक शहर एक खतरनाक वायरस से संक्रमित हो जाता है , लोगो को वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए जल्द से जल्द एंटी डोस देना जरूरी होता है , कम समय में पूरे शहर के लोगो को एंटी डोज़ संभव नहीं होने पर उस दवा यानि एंटी डोज़ को हवा के माध्यम से ही लोगो में पहुचाया जाता है .......बस हमें भी यही करना है ।
आपके परिवार में से जो भी होलिका पूजन के लिए जाए उन्हें बताये की होलिका दहन में कपूर जरूर से डालें ।
अपने पड़ोसियों, मित्रो, रिश्तेदारों सभी को बताये ।
इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ।

Tuesday, 24 February 2015

उलटी दस्त का घरेलु उपचार

उल्टी और दस्त के घरेलु उपचार

घर के किसी भी छोटे बड़े सदस्य को उल्टी एवँ दस्त किसी भी वजह से हो सकते हैं जिनमें से बदहजमी सबसे मुख्य है। कभी-कभी सर्दी या गर्मी लगने, दूषित खानपान से भी उल्टी और दस्त की समस्या हो जाती है ।

उल्टी होने पर नीँबू का रस पानी में घोल कर लेने से शीघ्र ही फायदा होता है ।

आप एक दो लौंग, दालचीनी या इलायची मुहँ में रखकर चूसिये यह मसाले उल्टियाँ विरोधक औषधियों होने के कारण उल्टियाँ रोकने में बहुत ही मददगार साबित होते है।

तुलसी के पत्तों का एक चम्मच रस शहद के साथ लेने से उल्टी में लाभ मिलता है ।

एक चम्मच प्याज का रस पीने से भी उल्टी में लाभ मिलता है ।

गर्मियों में यदि बार बार उल्टियाँ आती है तो बर्फ चूसनी चाहिए ।

पुदीने के रस को लेने से भी उल्टी में लाभ मिलता है ।

धनिये के पत्तों और अनार के रस को थोड़ी थोड़ी देर के बाद बारी-बारी से पीने से भी उल्टी रुक जाती है ।

1/4 चम्मच सोंठ एक चम्मच शहद के साथ लेने से उल्टी में शीघ्र आराम मिलता है ।

नींबू का टुकड़ा काले नमक के साथ अपने मुंह में रखने से आपको उल्टी महसूस नहीं होती है, रुक जाती है ।

आधा चम्मच पिसे हुए जीरे का पानी के साथ सेवन करने से उल्टियों से शीघ्र छुटकारा मिलता है ।

एक गिलास पानी में एक चम्मच एप्पल का सिरका डालकर पियें उल्टी में तुरंत आराम मिलेगा ।

उल्टियाँ होने से 12 घंटो बाद तक ठोस आहार का सेवन न करें, लेकिन भरपूर मात्रा में पानी और फलों के रस का सेवन करते रहें।

तैलीय, मसालेदार, भारी और मुश्किल से पचनेवाले खाद्द्य पदार्थों का सेवन न करें इससे भी उल्टियाँ आती है ।

पित्त की उल्टी होने पर शहद और दालचीनी मिलाकर चाटें ।

हरर को पीसकर शहद के साथ मिलाकर चाटने से उल्टी बंद होती है|

खाना खाने के तुरंत बाद न सोयें। खाने के बाद टहलने की आदत डालें । जब भी सोयें तो अपनी दाहिनी बाज़ू पर सोयें। इससे आपके पेट के पदार्थ मुंह तक नहीं आयेंगे ।

दही, भात, को मिश्री के साथ खाने से दस्त में आराम आता है।

एक एक चम्मच अदरक , नीबूं का रस काली मिर्च के साथ लेने पर भी दस्त में आराम मिलता है ।

सौंफ और जीरे को बराबर-बराबर मिला कर भून कर पीस लें । इसे आधा-आधा चम्मच पानी के साथ दिन में तीन बार लेने से दस्तों में फायदा मिलता है ।

केले, सेब का मुरब्बा और पके केले का सेवन करें दस्त में तुरंत आराम मिलेगा ।

दस्त आने पर अदरक के टुकड़े को चूसे या अदरक की चाय पियें पेट की मरोड़ भी शांत होती है और दस्त में भी आराम मिलता है ।

दस्त रोकने के लिए चावल के माड़ में हल्का नमक और काली मिर्च डालकर उसका सेवन करें दस्त रुक जायेंगे ।

जामुन के पेड़ की पत्तियाँ पीस कर उसमें सेंधा नमक मिला कर 1/4 चम्मच दिन में दो बार लेने से दस्त रुक जाते है ।

दस्त आने पर दूध और उससे बनी हुई चीजों का सेवन कतई भी ना करें ।

दस्त आने पर दस्त के साथ शरीर के खनिज वा तरल पदार्थ बाहर निकलते है इनकी कमी पूरी करने के लिए O.R.S का घोल पियें ।

पेट दर्द का घरेलु उपचार

पेट दर्द के घरेलू उपचार

पेट में दर्द होना एक आम समस्या है ,जिससे लगभग सभी व्यक्तियों को जीवन में बार बार सामना करना पड़ता है | इनके कई अलग अलग काऱण हो सकते है । पेट दर्द के मुख्य कारण कब्ज का होना, ज्यादा गैस बनना, अपच, विषाक्त भोजन सेवन करना आदि सकता हैं।यहाँ पर हम कुछ आसान से उपाय बता रहे है जिसको करके आप पेट दर्द में आराम प्राप्त कर सकते है ।

*पेट दर्द मे हींग बहुत ही लाभकारी है। 5 ग्राम हींग थोडे पानी में पीसकर पेस्ट बनाएं। इसे नाभी पर और उसके आस पास लगायें फिर क़ुछ देर लेटे रहें। इससे पेट की गैस निकल जायेगी और दर्द में राहत मिलेगी ।

*जीरा पेट दर्द मे बहुत हि लाभदायक है । जीरा को तवे पर भून ले । 2-3 ग्राम की मात्रा गरम पानी के साथ दिन मे 3-4 बार लें या वैसे ही चबाकर खाये शीघ्र लाभ प्राप्त होता है।

*10 ग्राम तुलसी का रस पीने से पेट की मरोड़ व दर्द जल्दी ही ठीक होता है।

*त्रिफला का 100 ग्राम चूर्ण में 75 ग्राम चीनी मिलालें इस चुर्ण का 5 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 -3 बार पानी के साथ सेवन करें। इससे पेट की सभी बीमारियां समाप्त होती हैं।

*सूखा अदरक को मुहं मे चूसने से पेट दर्द में तुरन्त राहत मिलती है।

*पेट दर्द में पानी में थोडा सा मीठा सोडा डालकर पीने से फ़ायदा होता है।

*बिना दूध की चाय पीने से भी पेट दर्द में आराम मेहसूस होता हैं।

*अजवाईन तवे पर भून लें। इसको काला नमक के साथ मिलाकर 2-3 ग्राम गरम पानी के साथ दिन में 3 बार लेने से पेट के दर्द में शीघ्र आराम मिलता है।

*एक चम्मच अदरक के रस में 2 चम्मच नींबू का रस और थोडी सी चीनी मिलाकर दिन मे 3 बार लेने से भी पेट दर्द में आराम मिलता है।

किसी भी पेट दर्द में केला खाना लाभकारी होता है। केला एक पोषक आहार होता है। केले का सेवन से पेट दर्द में शीघ्र आराम मिलता है।नींबू के रस में काला नमक, जीरा, अजवायन चूर्ण मिलाकर दिन में तीन चार बार लेने से पेट दर्द से आराम मिलता है।

*हरा धनिया का रस एक चम्मच शुद्ध घी मे मिलाकर लेने से पेट के दर्द में शीघ्र आराम मिलता है।

*अनार पेट दर्द मे बहुत लाभदायक माना गया है। अनार के बीज थोडी मात्रा में नमक और काली मिर्च के साथ दिन में दो तीन बार लें।

*मूली की चटनी, अचार, सब्जी या मूली पर नमक, काली मिर्च डालकर खाने से पेट के सभी रोग दूर होते है।

*चौलाई की सब्जी बनाकर खाने से पेट की सभी बीमारियां समाप्त होती है।

*सौंठ का 1 चम्मच चूर्ण और सेंधा नमक को एक गिलास पानी में गर्म करके पीने से पेट दर्द खत्म हो जाता है।

*इसबगोल को दूध के साथ रात को सोते वक्त लेते रहने से पेट के दर्द में आराम मिलता है ।

*प्याज को आग में गर्म करके रस निकाल लें और इस रस में नमक मिलाकर पीएं। इससे भी पेट का दर्द ठीक हो जाता है।

*दो चम्मच ग्राम सौंफ़ रात भर एक गिलास पानी में गलाएं इसे सुबह खाली पेट छानकर पीयें पेंट दर्द मे आराम मिलता है