Thursday, 25 June 2015

कर्म की गति न्यारी

कर्म की गति न्यारी...

एक राजा ब्राह्मणों को 
लंगर खिला रहा था 
जब राजा किसी एक ब्राह्मण को लंगर परोस रहा था 
उसी समय एक चील अपने पंज्जे में एक मुर्दा साँप लेकर राजा के उपर से गुजरी
तभी उस मुर्दा साँप के मुख से कुछ बुंदे जहर की खाने में गिर गई 
किसी को कुछ पत्ता नहीं चला 
फल स्वरूप वह ब्राह्मण जहरीला खाना खा के मर गया 
जब राजा को सच पत्ता चला तो उसे बहुत बहुत दुख हुआ
अब यमराज के लिए फैसला करना मुश्किल हो गया 
कि अब यह कर्म किसके खाते मे जायेगा ?
राजा जिसको पता ही नहीं था कि खाना जहरीला हो गया है .....
या
वह चील जो जहरीला साँप लिए राजा के उपर से गुजरी..
या 
वह मुर्दा साँप ......

कुछ समय बाद 
कई ब्राह्मण राजा से मिलने उस राज्य मे आए 
उन्होंने किसी महिला से महल का रास्ता पुछा 
उस महिला ने रास्ता बताते हुए कहा 
"जरा ध्यान रखना अपना ,वह राजा आप जैसे ब्राह्मणों को मार देता है जैसे ही उस महिला ने यह शब्द कहे
यमराज ने फैसला ले लिया कि उस ब्राह्मण को मारने का बुरा करम इस महिला के खाते में जाएगा
सीख :
अगर आप किसी व्यक्ति की बुराई करते हो 
और आपको बात की सही जानकारी है तो आपको उस व्यक्ति के आधे बुरे कर्म भोगने पडेंगें
लेकिन अगर बात की सही जानकारी नहीं है तो आपको उस व्यक्ति के पूरे बुरे कर्म भोगने पडेंगें