Friday, 24 October 2014

अनजाने में आप अपने लाडले को कही बीमारी की सौगात तो नहीं दे रहे हैं Ruchi रूचि in Other | Oct 15 अनजाने में आप अपने लाडले को कही बीमारी की सौगात तो नहीं दे रहे हैं बच्चे को शाम के समय घूमने ले के चल दिए दुकान से ख़रीदा कुरकुरे बच्चे के लिए बच्चा भी खुश और आप भी अब आप एक काम कीजिये कुर कुरे का एक दाना लीजिये माचिस जलाइए और कुरकुरे के करीब ले जाइये फिर देखिये क्या होता है और एक कुरकुरे कितनी देर तक जलता हैं फिर आप तो पूरा पाकेट ही खिला रहे है और न जाने कितने दिन से खिला रहे हैं ऐसा इसलिए हुआ की कुर कुरे बना हैं थोड़ा मक्का थोड़ा सा गाय और सुवर की चर्बी और 12% प्लास्टिक से आप अनजाने में न जाने कितना ही खिला चुके हैं प्लास्टिक आपके बच्चे को बीमार और अधिक बीमार करेगा सोचने वाली बात ये हैं की आखिर ये कंपनी ऐसा करती क्यों हैं तो जानिए इन कंपनी को आप के स्वस्थ से कोई लेना देना नहीं हैं इन्हे चाहिए पैसा गाय और सुवर की चर्बी क्यों प्रयोग करती हैं ये कम्पनी क्यों की विदेशी ना गाय बख्सते हैं न ही सुवर और ये सब इनके देश में और हमारे यहाँ भी खूब धड्ड्ले से कटी जाती हैं फिर ये चर्बी होगी क्या मांश तो खा लिया और अगर भारतीयों को पता चल गया तो खाना तो दूर की बात ये छुएंगे तक नहीं तो कंपनी इसे बनती हैं थोड़ा टेस्टी और रंग बिरंगे पाकेट में भर के टीवी पर किसी छमिया को पैसे दे के भौकने को बोलती है और ये छमिया भौकती भी हैं जैसे की टेड़ा है पर मेरा हैं इतनी सी बात कहती हैं जूही और चलती बनती हैं और आप ले के आ जाते हैं बिना जाने बिना समझे अब बात करते हैं की कंपनी को क्या फायदा तो जान लीजिये क्यों आप ने एक बार पैसा दिया कुर कुरे के नाम पर और बेकार पड़ी चर्बी खा ली कचड़े से पैसा बना के कंपनी निकल ली अब कुछ साल बाद बीमारी पेट में दर्द सांस फूलना आदि आदि अब आप डाक्टर के पास फिर दवा और दवा कितनी महँगी होती हैं आप जानते हैं उसकी लागत होगी १ रुपये तो आपसे लिया जायेगा मात्र 99 रुपये जिसमे कम्पनी को उन एजेंट को भी देना है जो बैग ले के चस्मा लगा के रोज ही डाक्टर के केबिन में दीखते हैं फिर मेडिकल वाले को और अंत में उस डाक्टर को भी तो गिफ्ट में नयी कार देना हैं फ्रिज देना हैं वो सब कुछ उस 99 रुपये मात्र में हो जाता हैं फिर चेक उप के नाम पर ये सब होता हैं आपकी ऐसी ही गलती से आगे भी करिये और दवा के छेत्र में 70 % पैस जाता है अमेरिका आप जिओ या मारो वैसे भी रोज मरते ही तो हो 125 करोड़ से 2 4 कम भी हो जायेंगे तो क्या फर्क पड़ेगा और अगर न कर सके तो एक शेयर कर दे कॉपी पेस्ट करे और कर सके तो एक ३ रुपये का छोटा कुरकुरे का पाकेट ले और लोगो के सामने उसे जलाये और ये जागरूकता फैलाये पहले खुद कर के देखे फिर औरो को भी दिखाए आँख के अन्धो को समझया जा सकता हैं दिमाग के अन्धो को दिखा के ही समझाया जा सकता हैं उम्मीद करती हु सायद थोड़ा भी समझ आ जाये तो मेरा लिखना बेकार नहीं जायेगा