Saturday, 1 August 2015

: गर्भवती निरोगी कैसे रहें ?

: गर्भवती निरोगी कैसे रहें ?

सभी गर्भवती महिलाओं को अपने स्वस्थ जीवन के लिये एवं होने वाली संतान की अच्छे स्वास्थ्य हेतु गर्भावस्थाके दिनों में निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए :

1. गर्भवती महिलाओं को हमेशा क्रोध, दुःख, आदि नकारात्मक भावों और विचारों से बचकर रहना चाहिए.उन्हें हमेशा खुश और प्रसन्न रहना चाहिए.

2. मन में कभी कलुषित विचार न आने दे, न किसी कीनिंदा करें, न ही सुने. किसी के साथ ईर्ष्या का भाव नहीं रखें.

3. किसी वस्तु को चोरी-चोरी खाने की कोशिश न करें. न किसी वस्तु को चुराने का भाव मन में लाएं. हमेशासात्त्विक, धर्मयुक्त, एवं परोपकारी भाव रखे. क्योंकिइनका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है. जैसे विचार या भाव गर्भवती के रहेंगे, वैसी ही गर्भ की प्रकृति निर्मितहोगी.

4. सड़े-गले, गंदे पदार्थ एवं रात का बचा बासी भोजन न खाएं. शुद्ध सात्त्विक एवं भूख से कम भोजन करे.

5. भाँग, मदिरा, धूम्रपान एवं अन्य नशीले पदार्थ का सेवन न करे.

6. गंदा साहित्य न पढ़े, न अश्लील सिनेमा आदि ही देखे.अपने शयन-कक्ष में भद्दे-गंदे चित्र न लगाएं, न उनका अवलोकन करे. भगवान के, संत-महापुरुषों के तथा वीरसपूतों के सुन्दर चित्र लगाएं.

7. दिन में अधिक न सोये. रात में अधिक देरतक न जगें.

8. हमेशा शरीर को शुद्ध, स्वस्थ बनाए रखने का प्रयास करे. गंदी हवा एवं अशुद्ध वातावरण से दूर रहे.

9. सहवास से सर्वथा दूर रहे. इससे गर्भपात होने का डर रहता है अथवा शिशु अल्पायु या विकृत अंग वाला हो सकता है, इन दिनों संयम-नियम से रहे.

10. अधिक जोर से हँसना, जोर से चिल्लाना, अधिक बोलना, बार-बार चिढऩा, हमेशा क्रोधयुक्त चेहरा बनाएरखना एवं अपशब्दों का बार-बार प्रयोग करना गर्भवती के लिए वर्जित है.

11. अधिक रोना, शोक करना, अधिक चिंता करना भी उचित नहीं है, इसका गर्भस्थ के हेल्थ पर प्रभाव पड़ता है.

12. गर्भवती महिला को कोयले से या नाखून से धरती पर नहीं लिखना चाहिए, न कोई आकृति बनानी चाहिए.

13. गर्भावस्था में महिलाओं को बार-बार सीढिय़ाँ चढऩा-उतरना नहीं चाहिए, न भारी वजन उठाना चाहिए तथा हाथी, घोड़ा और ऊँट की सवारी करना भी वर्जित है.

14. गर्भवती महिला को नाव में बैठकर नदी पार करना या जलाशय की सैर करना मना है. न अकेले में किसी पेड़ के नीचे सोना चाहिए.

15. कटु, तीखे, कसैले, अधिक गर्म या अधिक चटपटे मसालेदार पदार्थ नहीं खाने चाहिए.

16. गर्भवती को पपीता नहीं खाना चाहिए, इससे गर्भक्षय होने का भय रहता है.

17. गर्भवती को बाल खुले रखना, सबेरे देरतक सोते रहना एवं कुकुट की तरह बैठना वर्जित है.

18. देरतक आग के पास बैठना या अधिक ठंडे स्थान पर बैठकर कार्य करना, झाड़ू, सूप, ऊखल, राख या कंडे पर बैठना मना है.

19. गर्भवती महिला को हमेशा उत्तम सुसंस्कृत साहित्यका अध्ययन करना, अच्छे गीत एवं ईश्वर- भजन करना चाहिए.

20. गर्भवती के लिए अधिक उपवास करना, गरिष्ठ भोजन करना, अवशिष्ट पदार्थ का सेवन करना वर्जित है. 

इस प्रकार गर्भवती महिला के द्वारा किये गये क्रिया-कलाप, खान-पान, बोल-चाल, श्रवण -मनन आदि का गर्भ पर गहरा प्रभाव पड़ता है. अत: गर्भावस्था के समय महिलाओं को बहुत सावधान रहकर जीवन-यापन करना चाहिए. गर्भवती माता का व्यवहार ही बच्चे का व्यवहारनिर्मित करता है.
............ गिरीश .....
मासिक धर्म की समस्या...

घरेलू उपचार
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दूध तथा दूध से बनी चीजों का सेवन करे जिससे हार्मोन के स्तर का उतार चढाव कम होता है |
इन दिनों किशोरियों को मुंहासे भी अधिक परेशान करते हैं यह ऐसा एंड्रोजन नामक हार्मोन के उत्पादन में वृध्दि की वजह से होता है | यह त्वचा से आयल स्रवित करने का काम करता है और यह रोम छिद्रों को बंद कर देता है जिसकी वजह से मुंहासे निकलते हैं | इससे बचने के लिए मासिक शुरू होने के एक हफ्ते पहले से ही अपने चेहरे की त्वचा को साफ करने का कामशूरू कर दें |
डिसमेनोरिया ग्रस्त युवती ,महिला को हर माह मेन्सेस शुरू होने से एक सप्ताह पहले से ही नमक कम खाना चाहिये |
पेट,पडू में दर्द होने से गरम पानी से स्नान करें,तथा पेडू की सेकाई करें |
पर्याप्त मात्रा में संतुलित भोजन करें,हरी साग सब्जियां,मौसमी फल का उचित मात्रा में सेवन करें |
तनाव ,चिंता से दूर रहें. मेन्सस के संबंध में गलत धारणा न पालें |
लेटते समय पैरों के नीचे तकिया लगाकर सोयें |
इन दिनों अधिक ठंडी चीजों का सेवन न करें |
मेन्सस शुरू होने से दो चार दिन पहले से आधा चम्मच हल्दी फांक कर गुनगुना पानी पी लें इससे रूका हुआ मेंन्सस भी साफ हो जाता है और अंदरूनी इंन्फेक्शन भी ठीक होता है |
अंदरूनी अंगो की सफाई बराबर रखें. किसी एंटी वैक्टीरियल सोप से अंडरगर्मेंट साफ करें | वरना इंन्फेक्शन के चांसेस बढ़ सकते हैं |
किसी-किसी को मासिक धर्म के समय पेडू में दर्द एवं ऐठन होता है इसके कई कारण हो सकते है | यदि अधिक तकलीफ हो तो डॉक्टर की सलाह लें, कई बार घरेलू उपाय से भी ठीक हो सकता है –
घरेलू उपाय
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गुड, अजवाइन का हलवा बनाकर खाने से पेडू में होने वाला दर्द एवं ऐठन तथा आने वाला मासिक धर्म ठीक हो सकता है |
मासिक धर्म के समय जांघों का दर्द हो, तो नीम के पत्ते 5 ग्राम अदरक का रस 10 ग्राम इसमें इतना ही पानी मिलाकर इस काढे को जरूरत अनुसार दो चार बार पियें |
मासिक धर्म अनियमित हो तो –
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दो चम्मच गाजर का बीज (बाजार में उपलब्ध होता है जहां सब्जियों के बीज मिलते हैं) तथा गुड़ एक गिलास पानी में उबालकर रोज सुबह शाम पियें |
50 ग्राम सोंठ, गुड 30 ग्राम, 5 ग्राम कुटी जौ, वायविडंग, (जड़ी बूटी की दुकान पर मिल जाता है) 1 गिलास पानी में उबाले काढ़ा बनाऐं. आधा-आधा कप, तीन-तीन घंटे बाद पियें | रूका हुआ मासिक स्त्राव शुरू हो जायेगा |
दो गिलास पानी में 4 चम्मच राई उबालकर पानी छान लें उससे कपड़ा भिगाकर पेट सेकें | इससे मासिक स्त्राव खुलकर होगा व दर्द भी कम होगा |
तुलसी की जड़ को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें, इस पावडर की चुटकीभर मात्रा पान में रखकर खाने से अनावश्यक रक्त स्त्राव (अधिक मात्रा में होने वाला) बंद होता है. 〰〰〰〰गिरीश  〰〰
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दुःख और नमक


दुख और नमक

एक बार एक नव युवक एक महात्मा जी के पास पहुंचा और बोला
“महात्मा जी, मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान हूँ , कृपया इस
परेशानी से निकलने का उपाय बताएं।

महात्मा बोले: “पानी के गिलास में एक मुट्ठी नमक डालो और उसे पियो..।”

युवक ने ऐसा ही किया.।
“इसका स्वाद कैसा लगा ?” महात्मा ने पुछा।

“बहुत ही खराब, एकदम खारा” युवक थूकते हुए बोला ।

महात्मा मुस्कुराते हुए बोले:
“एक बार फिर अपने हाथ में एक मुट्ठी नमक ले लो और मेरे पीछे-पीछे आओ। दोनों धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे और
थोड़ी दूर जाकर स्वच्छ पानी से बनी एक झील के सामने रुक गए।

“चलो, अब इस नमक को पानी में डाल दो , महात्मा ने निर्देश दिया।"
युवक ने ऐसा ही किया ।

“अब इस झील का पानी पियो”, महात्मा बोले ।
युवक पानी पीने लगा,

एक बार फिर महात्मा ने पूछा: “बताओ इसका स्वाद कैसा है,
क्या अभी भी तुम्हे ये खारा लग रहा है ?”

“नहीं, ये तो मीठा है , बहुत अच्छा है ”, युवक बोला ।

महात्मा युवक के बगल में बैठ गए और उसका हाथ थामते हुए बोले:

“जीवन के दुःख बिलकुल नमक की तरह हैं, न इससे कम ना ज्यादा ।
जीवन में दुःख की मात्रा वही रहती है, बिलकुल वही।

लेकिन हम कितने दुःख का स्वाद लेते हैं, ये इस पर निर्भर करता है कि हम उसे किस पात्र में डाल रहे हैं।

इसलिए जब तुम दुखी हो तो सिर्फ इतना कर सकते हो कि खुद के मन को बड़ा कर लो,

ग़िलास मत बने रहो

झील बन जाओ