Tuesday, 14 June 2016

मित्रता की मिसाल

मित्रता की मिसाल -

दो मित्र थे । वे बड़े ही बहादुर थे उनमे से एक ने अपने बादशाह के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाई । बादशाह बड़ा ही कठोर और बेरहम था जब उसे मालूम हुआ तो उसने उस नौजवान को फांसी पर लटका देने का आदेश दे दिया ।

नौजवान ने बादशाह को कहा आप जो कर रहे है वो ठीक है और मैं ख़ुशी ख़ुशी मौत के आगोश में चला जाऊंगा लेकिन आप मुझे थोड़ी मोहलत दीजिये कि मैं गांव जाकर अपने बच्चो से मिल आऊं ।

बादशाह ने कहा नहीं ऐसा नहीं हो सकता मुझे तुम पर भरोसा नहीं है तो उस नौजवान के मित्र ने कहा कि महाराज मैं इसकी जमानत देता हूँ अगर ये लौट कर नहीं आये तो इसकी जगह मुझे फांसी दे दीजियेगा तो बादशाह हैरान रह गया क्योकि अब तक उसने ऐसा कोई आदमी नहीं देखा था तो दूसरो के लिए अपनी जान देने को तैयार हो तो बादशाह ने उसे गांव जाने की सहमति दे दी और उसे छह घंटे का टाइम दिया गया ।

नौजवान चला गया और उसने देखा कि उसे लौटने में पांच घंटे का समय लगेगा और वो आराम से जाकर आ सकता है अपने बच्चो से मिलकर लौटते समय रस्ते में उसका घोडा ठोकर खाकर गिर गया और फिर उठा ही नहीं और उस नौजवान को भी चोट आई और इसी वजह से उसे आने में देरी हो गयी उधर छह घंटे बीत जाने के बाद उसका मित्र खुश हो रहा था और भगवान से प्रार्थना कर रहा था की उसका मित्र नहीं आये ताकि वो अपने दोस्त के काम आ सके ।

मियाद पूरी हो जाने के बाद मित्र को फांसी पर लटकाया जा रहा था कि नौजवान आ पहुंचा और उस से कहा अब तुम घर जाओ और मुझे विदा करो तो मित्र ने कहा यह नहीं हो सकता तुम्हारी मियाद पूरी हो गयी है तो नौजवान ने कहा ये मेरी सज़ा है सो जाहिर है मुझे इसे सहने दो तुम अपने घर जाओ ।

दोनों मित्रो की सज़ा को बादशाह देख रहा था तो उसकी आँखे डबडबा आयीं और उसने दोनों को बुलाकर कहा मेने तुमको माफ़ कर दिया है और तुम्हारी दोस्ती ने मेरे दिल पर गहरा असर डाला है और उसके बाद बादशाह ने कभी किसी पर जुल्म नहीं किया |

जरुरत से अधिक लालच अच्छा नहीं*

*जरुरत से अधिक लालच अच्छा नहीं*

किसी नगर में हरिदत्त नाम का एक ब्राम्हण निवास करता था उसकी खेती साधारण ही थी | इसलिए अधिकांश समय वो खाली ही रहा करता था | एक बार ग्रीष्म ऋतू  में अपने खेत पर वृक्ष की शीतल छाया में लेता हुआ था सोये सोये उसने अपने समीप ही सर्प का बिल देखा उस पर  सर्प फन फेलाए बैठा था उसको देखकर वह ब्राह्मण विचार करने लगा कि हो न हो यही मेरे क्षेत्र का देवता है मेने कभी इसकी पूजा नहीं की |

अंत: मैं आज अवश्य इसकी पूजा करूँगा यह विचार मन में आते ही वह उठा और कंही से जाकर दूध मांग लाया उसे उसने एक मिटटी के बर्तन में रखा | और बिल के समीप जाकर बोला हे क्षेत्रपाल आज तक मुझे आपके विषय में मालूम नहीं था इसलिए मैं किसी प्रकार की पूजा अर्चना नहीं कर पाया आप मेरे इस अपराध को क्षमा कर मुझ पर कृपा करें और मुझे धन धान्य से समृद्ध कीजिये।

इस प्रकार प्रार्थना करके उसने उस दूध को वन्ही पर रख दिया फिर अपने घर को लौट गया और दुसरे दिन प्रात: काल जब वह अपने खेत पर आया तो सर्वप्रथम उसी स्थान पर गया वंहा उसने देखा की जिस बर्तन में उसने दूध रखा था उसमे एक स्वर्ण मुद्रा रखी हुई है उसने उस स्वर्ण मुद्रा को उठाकर रख लिया उस दिन भी उसने उसी प्रकार सर्प की पूजा की और उसके लिए दूध रखकर चला गया अगले दिन प्रात: काल उसको एक स्वर्ण मुद्रा मिली

इस प्रकार नित्य वह पूजा  करता अगले दिन उसको एक स्वर्ण मुद्रा मिल जाया करती थी कुछ दिनों बाद उसको किसी कार्य से अन्य शहर में जाना पड़ा उसने अपने पुत्र को उस स्थान पर दूध रखने का निर्देश दे दिया उस दिन उसका पुत्र गया और उसने वंहा दूध रख दिया दूसरे दिन जब वह पुन: दूध रखने गया तो देखा कि वंहा स्वर्ण मुद्रा रखी हुई है ।

तो लड़के में मन में लालच जग गया उसने सोचा निश्चित ही इस सर्प के बिल के नीचे ढेर सारा स्वर्ण भंडार होगा जबकि उसे खोदने में ये डर था कि सर्प  काट लेगा तो उसने दूध रखने के पश्चात सर्प के बाहर निकलते ही उसे लाठी से मरने की कोशिश की सर्प तो नहीं मर पर गुस्से में आकर सर्प ने उसे काट लिया और लड़के की वंही मृत्यु हो गयी |

*शिक्षा : हमे बेवजह कुछ बिना सोचे समझे आकर्षक लगने वाली चीजों की और आकर्षित होकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए क्योकि लालच हमेशा नुकसान लिए होता है |*