Wednesday, 23 September 2015

मुर्ख भिखारी

एक बार की बात हे एक मूर्खे नास्तिक भिखारी था मंदिर में के आगे भीख मांगता था। किसी भी मंदिर के पास और कोई भी गरीब भिखारी उसको दिख जाता था तो बहुत जलता था।
भगवान् को नहीं मानता था। उसको सिर्फ मंदिर में आने जाने बाले लोगो के भीख में मिले पैसे से ही मतलब रहता था।
मन्दिर में से भगवान् सब देख रहे थे।
भगवान् ने सोचा की ये रामलाल भिखारी रोज कुछ मेरा नाम लेने बाले भिखारी भक्तो को परेसान करता हे
कुछ ऐसा किया जाये इसको सिर्फ पैसे से मतलब हे इसको ढेड़ सारा पैसे का इंतजाम करता हु

पैसे आ जायेगे तो भीख मांगना भी छोड़ देगा और किसी को परेसान नहीं करेगा।
भगवान् ने इंसान का रूप रखकर मंदिर ने आये
उस भिखारी को एक लॉटरी की टिकिट दी

और कहा ये लॉटरी का टिकिट हे 50 लाख की लॉटरी का हे ।

ये पैसे निकालकर अपना काम चलना और कभी भी भीख मत मांगना
भिखारी खुश होकर चल दिया। लॉटरी के पैसे लेकर उसने बहुत बड़ा मिन्दिर बनबाया
मंदिर को देख कर एक दूसरे भिखारी ने उससे बोला की तू बहुत धार्मिक हो गया हे
इतने पैसे आये कहा से
और मिन्दिर बनबना कुछ समझ नहीं आया

भिखारी बोला ये मंदिर मेरा हे

इसमें सिर्फ में ही भीख मांगूगा।
मूर्खे इंसान को कितना भी ज्ञान दो बह मूर्खता नहीं छोड़ सकता
बुरे कर्मे करने बाले लोग हमेसा बुरे कर्मे ही करते हे कितना भी उनको कितना भी सुधारने की कोसिस करो जहा हे बही रहेगे

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