Tuesday, 4 August 2015

हम सोचते हे बो सत्य नहीं होता

एक बार राज्य की जनता अपने राजा के पास एक अद्भुत समय ले कर गयी ..!!
राजा ने सभी का आदर सत्कार कर समस्या की जानकारी मांगी..?
सभी ने एक स्वर में कहा महाराज नगर के बाहर मंदिर का पुजारी राज्य की जनता के लिए मनहूस है,जो  कोई भी सुबह पहले उसका दर्शन कर लेता है उस दिन उस
दर्शनकर्ता का कोई अनिष्ट निश्चित है,,
अतः जनहित में उसे मृत्यु दंड दिया जाये.,
उन्होंने कई प्रकार के प्रमाण व् दलीले दी,,
राजा ने उनको समझते हुए कहा ठीक है
मैं खुद इसकी तफशिस करूँगा और वादा
करता हूँ अगर ऐसा ही निकला तो मैं
उसे अवश्य दंड दूंगा..!
एक दिन संयोग से राजा का उस व्यक्ति से सर्वप्रथम सामना हो जाता है और उससे भी बड़ा सन्जोग की उस दिन राज आखेट जाता है ,और सैनिको से बिछुड़ जाता है,,
आखेट मे भी कुछ नही मिलता है,उसका घोङा भी बीच रास्ते मे मर जाता है,,,राजा मुश्किल से भूखा प्यासा नगर तक आता है अब तो उसे विश्वास हो गया कि वो पुजारी
राज्य के लिए मनहुस है,,,
राजा ने आनन फानन मे उसे रात्री मे ही बन्दी बना सुबह भरी सभा मे दण्ड का ऐलान करने का निर्णय सुनाया,,
सुबह जब सभा बैठी और राजा ने जनता की सारी बाते व अपने साथ घटी बात के आधार पर उस व्यक्ती को मृत्यु दण्ड सुनाते हुए उसकी आखरी ईच्छा पुछी,,,
उस व्यक्ती ने राजा से एक सवाल पूछने
की इच्छा जताई,,
राजा ने उससे सवाल करने की इजाजत दे दी, तो उसने कहा,,
महाराज भूख बुरी कि मौत ..?
राजा ने कहा निशंदेह मौत....!!
महाराज आपने कल सर्वप्रथम मेरे दर्शन किये,,और आपको कल भोजन नही मिला
परन्तु आपके प्रथम  दर्शन से मुझे मौत मिल रही है,,,अब बताइये इसमे बङा मनहुस कौन है,,
राजा को काटो तो खून नही और लाजवाब हो गया और सिंहासन से उतर कर उस पुजारी से क्षमा माग राजदरबार मे उचित स्थान प्रदान कर सम्मान दिया...!!
******भावार्थ...***हरवक्त आप सोचते या कहते है वो ही सत्य या पूर्ण सत्य नही होता,,,
सत्य इसके ईतर भी हो सकता है
-

No comments:

Post a Comment