Friday, 19 December 2014

मनुष्य का कर्तब्य

परम पिता परमात्मा ने मनुस्य की उत्पत्ति इसलिए की कि वह सम्पूर्ण प्रकृति का उपभोग करता हुआ मानवता की सेवा कर सके,एक दूसरे की सहायता और सेवा के माध्यम से मानवता को और पुस्ट कर सके । इसी में जीवन की सार्थकता निहित है ।जीवन का मतलब सुविधाओ का भोग करते हुए, वैभव का प्रदर्शन करते हुए जीना नहीं, जीवन का मतलब अपने से कमजोर की ताकत बनना, सहृदयता के साथ दुसरो की जरुरतो में काम आना, अपने विकास के साथ विस्व समुदाय को दिशा देना है ।
हम इतने सक्षम नहीं है की इसी समुदाय के अग्रणी बन सके लेकिन इतने तो जरूर है की अपने आलावा कुछ और लोगो के जीवन उत्थान में सहायक बन सके, यही हमारे जीवन की सार्थकता है और मानवता के साथ ईश्वर की सच्ची सेवा है ।।
रामकुमार ओझा

No comments:

Post a Comment